Free shipping for all orders from ₹599+
**10% OFF ON PREPAID ORDERS**
Vadyaroot
Cart 0
  • Home
  • Catalog
  • Contact
  • Piles Care
  • Blog
My Account
Log in Register
English
  • Home
  • Catalog
  • Contact
  • Piles Care
  • Blog
Vadyaroot
Account Wishlist Cart 0

Search our store

Vadyaroot
Account Wishlist Cart 0
Popular Searches:
T-Shirt Blue Jacket
News

“Internal Piles aur External Piles

by My Store Admin on Mar 16, 2026
“Internal Piles aur External Piles

अंदरूनी और बाहरी बवासीर में अंतर: लक्षण, कारण, उपचार

 Description (हिन्दी): जानें अंदरूनी और बाहरी बवासीर (पाइल्स) में क्या अंतर है, उनके लक्षण, कारण, निदान और उपचार विकल्प। पढ़ें विशेषज्ञ सलाह, घरेलू उपाय और बचाव के टिप्स।

 Headings:

  • : अंदरूनी और बाहरी बवासीर में अंतर
  • : बवासीर (पाइल्स) क्या है?
  • : अंदरूनी बवासीर (Internal Hemorrhoids)
  • : बाहरी बवासीर (External Hemorrhoids)
  • : लक्षणों की तुलना
  • : कारण और जोखिम कारक
  • : निदान (जांच विधि)
  • : उपचार विकल्प (संरक्षणात्मक से सर्जिकल)
  • : घर पर इलाज और घरेलू उपाय
  • : इमरजेंसी लक्षण और कब डॉक्टर को दिखाएं
  • : रोकथाम

सारांश

बवासीर (पाइल्स) गुदा मार्ग के चारों ओर की सूजी हुई नसें होती हैं। यह मुख्यतः दो प्रकार की होती हैं: अंदरूनी बवासीर गुदा के अंदर (रैक्टम में) और बाह्य बवासीर गुदा की बाहरी त्वचा पर होती है। आंतरिक बवासीर आमतौर पर दर्दरहित होती है और इसमें साफ लाल रक्तस्त्राव हो सकता है। बाहरी बवासीर खुजली, दर्द और सूजन पैदा कर सकती है। कब्ज, भारी वजन उठाना, गर्भावस्था जैसे कारण से बवासीर होती है। सरल निदान में डॉक्टर गुदा की जांच, डिजिटल (अंगुली) जांच या एनोस्कोपी करते हैं। उपचार में फाइबर युक्त आहार, जलसेक स्नान (सिट्ज बाथ), क्रीम, और आवश्यक होने पर बैंड लिगेशन या सर्जरी शामिल है। गंभीर दर्द या भारी रक्तस्त्राव होने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें।

बवासीर (पाइल्स) क्या है?

बवासीर (Hemorrhoids) गुदा मार्ग (रैक्टम और एनस) की वाहिकाओं के सूजने की स्थिति है। ये आमतौर पर कोमल फाइबर जैसे ऊतक के पैकेट (वस्कुलर कुशन) होते हैं जो मल नियंत्रित करने में मदद करते हैं। जब ये सूज जाते हैं या फैल जाते हैं, तो पाइल्स बनते हैं।

अंदरूनी बवासीर (Internal Hemorrhoids)

अंदरूनी बवासीर गुदा मार्ग की जालीदार रेखा (डेंटेट लाइन) के ऊपर, रेक्टम के अंदर विकसित होती है। चूंकि यह हिस्सा संवेदनहीन होते हैं, इसलिए आंतरिक बवासीर अक्सर दर्दरहित होती है। इस कारण से कई बार पता नहीं चलता जब तक कि भारी खून बहने लगे या यह बाहर की ओर निकल (प्रोलैप्स) जाए। अंदरूनी बवासीर प्राय: मलत्याग के दौरान चमकीले लाल रक्तस्त्राव (टॉयलेट पेपर या मल में रक्त) का कारण बनती है। कभी-कभी यह बाहर की ओर झुक सकती है (ग्रेड III–IV में प्रोलैप्स) जिसे वापस पुश करके अंदर रखा जा सकता है।

बाहरी बवासीर (External Hemorrhoids)

बाहरी बवासीर गुदा मार्ग की बाहरी त्वचा पर होती है, डेंटेट लाइन के नीचे। यह वो स्थान है जहां मल निकलने के बाद त्वचा और मांस पेशियों की सतह मिलती है। बाह्य बवासीर आमतौर पर संवेदनशील होती हैं, इसलिए इनमें खुजली, जलन, और दर्द अनुभव हो सकता है। कभी-कभी यह सूजन या गांठ के रूप में महसूस होती है। यदि बाह्य बवासीर में खून का थक्का बन जाए (थ्रॉम्बोसिस), तो वह नीलापन और तेज दर्द का कारण बन सकता है। बाहरी बवासीर नीचे की त्वचा पर दिखाई देती हैं और इन्हें महसूस या देख पाना आसान होता है।

लक्षणों की तुलना

नीचे तालिका में अंदरूनी और बाहरी बवासीर के मुख्य लक्षणों की तुलना दी गई है:

विशेषता अंदरूनी बवासीर बाहरी बवासीर
स्थान गुदा के अंदरूनी हिस्से (रैक्टम में) गुदा मार्ग की बाहरी त्वचा
दर्द आमतौर पर नहीं (जब तक थ्रॉम्बोसिस या प्रोलैप्स न हो) आमतौर पर दर्दनाक (खासकर थ्रॉम्बोसिस में)
खून बहना मलत्याग के साथ  खून (टोईलेट पेपर/मल) कभी-कभी हल्का रक्तस्राव (प्राय: थ्रॉम्बोसिस से)
खुजली/जलन कम (आमतौर पर नहीं होती) अक्सर खुजली और जलन होती है
प्रोलैप्स ग्रेड III–IV में गुदा से बाहर निकल सकती है आमतौर पर बाहर नहीं निकलती, त्वचा पर गांठ रहती है
उपचार विकल्प फाइबर/पानी, क्रीम, बैंडिंग इत्यादि क्रीम, Sitz बाथ, दर्दनिवारक; (थ्रॉम्बेक्टॉमी सर्जरी)

कारण और जोखिम कारक

बवासीर मुख्यतः गुदा क्षेत्र में अधिक दबाव के कारण होता है। ऐसे कई कारण हैं जो इस दबाव को बढ़ाते हैं:

  • कब्ज (Constipation): लंबे समय तक कब्ज रहने पर मलत्याग में जोर लगाने से नसों में सूजन आती है।
  • गर्भावस्था (Pregnancy): गर्भावस्था में बढ़ा पेट और हार्मोनल बदलाव से गुदा की नसों पर दबाव बढ़ता है।
  • लंबे समय तक बैठना या भारी वजन उठाना: शौचालय पर बहुत देर तक बैठने या भारी सामान उठाने से भी दबाव बढ़ता है।
  • कम फाइबर वाला आहार: फाइबर युक्त भोजन की कमी से कब्ज होती है, जिससे मल त्याग मुश्किल होता है।
  • मोटापा (Obesity): अधिक वजन होने पर भी गुदा क्षेत्र में दबाव बढ़ता है।
  • अन्य: निरंतर दस्त, बार-बार जोर लगाना, और कुछ मामलों में गुदा मार्ग का संभोग भी जोखिम बढ़ा सकता है।

इन जोखिमों के कारण गुदा की नसें लंबी अवधि तक सूज सकती हैं, जिससे बवासीर हो जाते हैं।

निदान (जांच विधि)

बवासीर की पुष्टि के लिए डॉक्टर चिकित्सकीय जांच करते हैं। इस में डॉक्टर गुदा क्षेत्र की बाहरी जांच करते ही बाहरी बवासीर या प्रोलैप्स (बाहर निकली गांठ) देख या महसूस कर सकते हैं। आंतरिक बवासीर के लिए अक्सर डिजिटल रेक्टल एग्ज़ाम  और एनोस्कोपी की जाती है। इसके अलावा यदि आवश्यकता हो तो सिग्मॉइडोस्कोपी से मलाशय या बड़ी आंत में देख सकते हैं।

यदि घरेलू उपाय एक सप्ताह तक करने पर भी लक्षण न बदलें या बिगड़ें, तो डॉक्टर से समय पर परामर्श लें। खासकर भारी रक्तस्त्राव, तेज दर्द,  जैसी गंभीर स्थितियों में तुरंत चिकित्सा सहायता जरूरी है।

उपचार विकल्प :

बवासीर के लिए उपचार का चयन लक्षण की गंभीरता पर निर्भर करता है। हल्के मामलों में संरक्षणात्मक उपाय से आराम मिलता है, जबकि गंभीर या लगातार समस्याओं में प्रोसीजर या सर्जरी की आवश्यकता हो सकती है।

  • संरक्षणात्मक उपचार (Conservative): पहला कदम है फाइबरयुक्त भोजन बढ़ाना (दिन में 25-35 ग्राम फाइबर) और अधिक पानी पीना। मल को नरम रखने के लिए इसबगोल  भूसी आदि लेने से कब्ज कम होती है। मलत्याग के समय जोर न लगाएं और टॉयलेट पर अधिक समय न बिताएं। गुनगुने पानी में बैठना (सिट्ज बाथ) दिन में कई बार दर्द और सूजन को कम करता है। स्थानीय उपयोग के लिए हीलिंग क्रीम या मलहम जैसे अएलोवेरा जेल, हाइड्रोकार्टिसोन युक्त क्रीम  खुजली और जलन कम कर देते हैं। रात में सोने से पहले  मलहम लगाने से आराम मिलता है।

  • दवाइयाँ (Medication): दर्द और सूजन के लिए एसिटामिनोफेन या आयबुप्रोफेन जैसी दवाएँ ली जा सकती हैं। डॉक्टर कुछ मामलों में फ्लावोनोइड सप्लीमेंट (जैसे बायोफ्लेवोनॉयड) भी सुझा सकते हैं जिससे सूजन घटती है। ध्यान रखें कि कोई भी ओटीसी मलहम एक सप्ताह से अधिक लगातार ना लगाएँ; यदि लक्षण नहीं सुधरते तो चिकित्सक को दिखाएं।

  • ऑफिस-आधारित प्रक्रियाएं (Office procedures): जब आंतरिक बवासीर से भारी खून आ रहा हो या गांठ अक्सर प्रोलैप्स हो तो डॉक्टर बैंड लिगेशन (रबर बैंड लगाना), स्क्लेरोथैरेपी (रसायन इंजेक्शन) या इन्फ्रारेड कोएगुलेशन आदि कर सकते हैं। इन प्रक्रियाओं से बवासीर के रक्त प्रवाह को रोककर वह सिकुड़ जाता है। ये तरीके आश्चर्यजनक रूप से प्रभावी होते हैं और सर्जरी की अपेक्षा दर्द व जटिलताएँ कम होती हैं।

  • सर्जिकल उपचार (Surgical): यदि बवासीर बड़े हों, बाह्य बवासीर बहुत दर्दनाक हैं, या प्रोलेप्टेड (बहरी) गांठ वापस नहीं बैठ रही है, तो सर्जरी की सलाह होती है। हेमोरोइडेक्टॉमी नामक सर्जरी में एक शल्य चिकित्सक बड़े बवासीर या प्रोलेप्टेड गाँठ को काटकर निकाल देता है। इसमें आमतौर पर ऐनस्थीसिया दिया जाता है। दूसरा विकल्प स्टेपलिंग (पाइल्स को हटाने के लिए स्टेपल यंत्र) है, जो मुख्यतः आंतरिक बवासीर की गांठ को अंदर की ओर खींचकर काटता है। इन सर्जिकल उपचारों के बाद पूर्ण स्वस्थ होने में कुछ सप्ताह लग सकते हैं। रक्तस्राव या इन्फेक्शन जैसी जटिलताएँ दुर्लभ हैं।

घर पर इलाज और घरेलू उपाय

हल्की बवासीर में कुछ घरेलू उपाय राहत दे सकते हैं:

  • गुनगुने पानी का Sitz बाथ (दिन में 10–15 मिनट तक) सूजन और दर्द कम करता है।
  • कोल्ड पैक लगाने से तेज दर्द और सूजन में कमी हो सकती है।
  • घाव न होने पाने के लिए साफ-सफाई का ध्यान रखें (नरम वेट वाइप्स या गीले कपड़े से साफ करें)।
  • एलोवेरा जेल या सिरका मिलाए बर्फ के टुकड़े दर्द राहत दे सकते हैं।
  • फाइबर युक्त आहार में अंकुरित अनाज, फल और सब्ज़ियाँ शामिल करें। आयुर्वेदिक रूप से त्रिफला या हरी सब्ज़ियाँ कब्ज दूर रखती हैं।

ये उपाय बवासीर के लक्षणों को कम करने में मददगार हैं लेकिन यदि लक्षण बढ़ें या ठीक न हों, तो चिकित्सक परामर्श आवश्यक है।

इमरजेंसी लक्षण और कब डॉक्टर को दिखाएं

कुछ स्थितियाँ आकस्मिक चिकित्सा चाहिए:

  • तेज़ दर्द और गंभीर रक्तस्राव: मलाशय से खून अत्यधिक बह रहा हो या दबाव बढ़ने पर बहुत दर्द हो।
  • बुखार या उल्टी: बवासीर के साथ पेट दर्द, बुखार या उल्टियाँ शुरू हो जाएँ तो अन्य समस्याओं का संकेत हो सकता है।
  • गुर्दे की समस्या: अत्याधिक सूजन या मल ठीक से नहीं निकल पा रहा हो, तुरंत डॉक्टर दिखाएँ।

इन लक्षणों के साथ देरी खतरनाक हो सकती है, इसलिए चिकित्सक के पास जाएँ और जांच करवाएँ।

रोकथाम

बवासीर से बचने के लिए जीवनशैली में बदलाव जरूरी है:

  • पर्याप्त फाइबर युक्त आहार लें (फल, सब्जियाँ, साबुत अनाज) और रोज़ाना 8-10 गिलास पानी पिएँ।
  • शौचालय पर अधिक देर तक न बैठें; मल आने पर तुरंत जाने की आदत डालें।
  • नियमित व्यायाम करें (ताकि कब्ज न हो) और भारी वजन उठाने से बचें।
  • बैठने या खड़े रहने का संतुलन रखें; लंबे समय तक बैठे रहने पर बीच-बीच में उठकर टहलें।

ये सावधानियाँ कब्ज तथा बवासीर दोनों को रोकने में मदद करती हैं।

Previous
Understanding Piles (Hemorrhoids): Ayurvedic Solutions for Natural Relief

Related Articles

Understanding Piles (Hemorrhoids): Ayurvedic Solutions for Natural Relief

Understanding Piles (Hemorrhoids): Ayurvedic Solutions for Natural Relief

Leave a Comment

Your email address will not be published.

Instagram

Let’s get in touch

Sign up for our newsletter and receive 10% off your first order

Policies

  • Terms of Service
  • Shipping Policy
  • Refund Policy
  • Privacy Policy
  • Contact Information

Company

  • Home
  • Catalog
  • Contact
  • Piles Care
  • Blog

Our store

© Vadyaroot global PVT. LTD. 2025
Payment options:

    Confirm your age

    Are you 18 years old or older?

    Come back when you're older

    Sorry, the content of this store can't be seen by a younger audience. Come back when you're older.

    Shopping Cart

    Your cart is currently empty.
    Add note for seller
    Estimate shipping rates
    Add a discount code
    Subtotal Rs. 0.00
    View Cart